Studio 2.0

अधूरी धुन को ब्राउज़र में Studio 2.0 में खोलिए और उसे सुनकर तय किए गए अरेंजमेंट में बदलना शुरू कीजिए। Suno से बनी रचना यहाँ प्रोजेक्ट की शक्ल लेती है, जहाँ हर अगला फैसला आपके कान और आपकी टाइमलाइन से निकलता है। जिस हिस्से पर कान अटकता है, वहीं लौटकर एडिट कीजिए और सत्र को अपने चुने हुए रूप तक ले जाइए।

जिस धुन से सत्र शुरू करना है।

सुबह लिखी गई नई धुन हो या पहले से पड़ा ऑडियो, सत्र की शुरुआत आपके पास मौजूद चीज़ से तय होती है। Suno पर बनी रचना से सीधे काम उठाइए, अपना ऑडियो इम्पोर्ट कीजिए, अपलोड किए हुए स्टेम्स लाइए या खाली प्रोजेक्ट खोलिए। जब कोई रिकॉर्डिंग साथ न हो, खाली प्रोजेक्ट में पहली परत से आरंभ करें। तैयार सामग्री पहले से हो, तो उसी सुनवाई से अगला एडिट पकड़ें। ब्राउज़र में चुना हुआ रास्ता खुलते ही आप उसी सत्र में काम आगे बढ़ाते हैं।

टाइमलाइन पर सुनकर अरेंजमेंट जमाइए।

टाइमलाइन पर पहले उस हिस्से को जगह दीजिए जिसे सुनते ही अरेंजमेंट का रुख साफ़ हो। उसके ऊपर दूसरी परत रखकर दोनों को साथ सुनें, फिर किसी हिस्से को बारीकी से सँवारें। पिच को धुन के मुताबिक बदलें, वॉल्यूम से परतों का संतुलन रखें और BPM से पूरे बहाव की चाल मिलाएँ। अलग हिस्सों को आगे-पीछे जमाते हुए सुनिए कि कौन सा मेल बना रहा है और किस जगह फिर एडिट चाहिए। किसी नए हिस्से को जोड़ने से पहले उसे अकेले सुनकर उसकी जगह तय कर लें।

अलग हिस्सों को अकेले सुनकर चुनिए।

एक ही रिकॉर्डिंग में वोकल, ड्रम्स और बास साथ हों, तो पहले अलग-अलग हिस्सों को सुनना काम की दिशा साफ़ करता है। Stem Splitter से किसी भी ऑडियो को उसके अलग-अलग हिस्सों जैसे वोकल, ड्रम्स, बास और दूसरे स्टेम्स में बाँटिए। हर हिस्से को अकेले सुनकर जिस पर काम करना हो, उसे चुनें और फिर बाकी परतों के साथ उसकी जगह जाँचें। अलग हुए हिस्सों को सुनते हुए जिस पल वोकल, ड्रम्स या बास पर काम करना हो, उसी हिस्से से अगला एडिट शुरू करें।

बदलाव को गीत के साथ चलाइए।

किसी गाने में एक पैरामीटर को शुरू से अंत तक एक ही तरह चलाने की ज़रूरत न हो, तो उसका बदलाव टाइमलाइन पर दर्ज कीजिए। कर्व खींचकर या अपनी हरकत रिकॉर्ड करके किसी भी पैरामीटर को ऑटोमेट करें। प्लेबैक के दौरान लेवल या इफ़ेक्ट का असर गीत के आगे बढ़ने के साथ बदलता सुनाई देगा। जिस जगह बदलाव शुरू करना है, वहीं से उसे सुनकर अगली एडिट तय करें।

मेलोडी के लिए इनपुट बदलकर सुनिए।

मेलोडी को पहले कंप्यूटर कीबोर्ड से सुर की तरह बजाकर देखें, फिर कॉर्ड चुनने वाले तरीके से हार्मनी के विकल्प खोलें। अरपेजिएटर नोट्स को गति में भेजता है, जिससे सिंथ पर बजने वाली लाइन का चलना सुन सकें। MIDI कंट्रोलर जोड़कर अंदर के सिंथ पर कॉर्ड, बासलाइन और मेलोडी बजाइए। एक ही विचार को अलग इनपुट से सुनते हुए तय करें कि अरेंजमेंट में किस लाइन को आगे रखना है और किसे पीछे।

साउंड को अपनी ज़रूरत के मुताबिक गढ़िए।

किसी ट्रैक के नाम बदलते-बदलते ध्यान धुन से हटने लगे, तो Chat Bar में अपने शब्दों में काम लिखिए। परत-दर-परत साउंड बनाने, सिंथ और प्लगइन शून्य से गढ़ने या कई ट्रैक्स के नाम एक साथ बदलने जैसी ज़रूरतें वहीं लिखी जा सकती हैं। ऑडियो इफ़ेक्ट्स में साइडचेन कंप्रेशन और कन्वोल्यूशन रीवर्ब जैसे इंडस्ट्री-स्टैंडर्ड विकल्प मिलते हैं। अपनी पसंद और तय किए गुणों के हिसाब से ऑडियो इफ़ेक्ट प्लगइन डिज़ाइन कीजिए, फिर बनाए गए विकल्प को उसी साउंड पर आज़माइए।

एक हिस्से पर रुककर अगला कदम चुनिए।

पहली बार अरेंजमेंट कर रहे मेकर को एक हिस्से पर रुककर अगला फैसला सुनना हो, तो तैयार काम को उसी सत्र से चुने हुए रूप में एक्सपोर्ट किया जा सकता है। टाइमलाइन का चयनित हिस्सा, अलग-अलग स्टेम्स या पूरा गीत, तीनों रास्ते खुले हैं। अनुभवी प्रोड्यूसर जिस रूप में आगे सुनना चाहता है, उसी को चुनकर सत्र से बाहर ले जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Studio 2.0 में सत्र की शुरुआत किन तरीकों से कर सकते हैं?
Suno पर बनी रचना, इम्पोर्ट किया ऑडियो, अपलोड किए स्टेम्स या खाली प्रोजेक्ट से सत्र शुरू कीजिए।
क्या एक ही ऑडियो से अलग-अलग हिस्से सुन सकते हैं?
Stem Splitter से किसी भी ऑडियो को वोकल, ड्रम्स, बास और दूसरे हिस्सों में बाँटकर अकेले सुनिए।
Studio 2.0 से किस तरह का हिस्सा एक्सपोर्ट कर सकते हैं?
टाइमलाइन का चुना हुआ हिस्सा, अलग-अलग स्टेम्स या पूरा गीत एक्सपोर्ट कीजिए।