
ऐ दिल… सच बता…
ऐ दिल… सच बता… जिसे खो दिया… उसे क्यों अब भी ढूँढता है… (Hook) ये दिल अब भी रोता है… हर धड़कन तेरा नाम लिखता है… साँसों की भीड़ में चुपके से, तेरा ही चेहरा दिखता है… ये दिल अब भी रोता है… खुद से भी कुछ ना कहता है… भीतर से टूटा हुआ सा, बाहर से बस हँसता है… (Antara 1) सावन भी आया था कल ही, पर मन तक बारिश पहुँची नहीं… बादल छाए लाख यहाँ, पर प्यास मेरी बुझी नहीं… तेरी आवाज़ की वो गूंज, अब भी दीवारों से टकराए… इस घर में कोई रहता नहीं, फिर भी कोई लौट आए… (Hook) ये दिल अब भी रोता है… हर धड़कन तेरा नाम लिखता है… टूटी हुई हर चाहत में, तेरा ही सपना बसता है… (Antara 2) मैंने वक़्त से पूछा जाकर, किस बात की ये सज़ा मिली… जिसे खुदा सा चाहा था, वो ही सबसे जुदा मिली… दरिया से सीखा है मैंने, बहना मगर डूबना नहीं… तू लौटे या ना लौटे, अब खुद को मैं खोना नहीं… (Bridge) कहते हैं लोग मोहब्बत, एक खेल है किस्मत का… पर दिल जो सच में टूटे, वो जानता है कीमत का… (Final Hook) ये दिल अब भी रोता है… पर जीना भी सीखता है… तेरे जाने के बाद भी देख, तुझसे ही ताक़त लेता है… ये दिल अब भी रोता है… हर धड़कन तेरा नाम लिखता है… ऐ दिल… अब छोड़ भी दे… या फिर पूरी तरह टूट जा…

