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RBSM जब भी सब बिगड़ता गया राधे नाम थामता गया

V5.5

[Intro – Spoken (dry)] हर बार… आख़िरी step पर आकर काम टूट जाता है… मेहनत पूरी… नतीजा अधूरा… सबको लगता है मैं ठीक हूँ… मुझे पता है… मैं नहीं हूँ… कितनी बार “कोई बात नहीं” बोलूँ…? [Pause] मैं हार नहीं रहा… मैं… थक रहा हूँ… [Transition – whisper] और फिर… नाम निकलता है… राधे… [Hook / Chorus – soft] जब भी सब बिगड़ता गया… “राधे” नाम थामता गया… जो हाथ से छूट रहा था… दिल में आकर रुकता गया… राधे… राधे… राधे… राधे… राधे… राधे… [Spoken Insert] कोई सुन नहीं रहा… इसलिए नाम ले रहा हूँ… बाहर कुछ नहीं बदल रहा… अंदर शोर बढ़ रहा है… बस एक बार… कुछ सही हो जाए… [Verse – tight + real] दिन भर भागा… फिर भी खाली हाथ आया… जो सीधा दिख रहा था… वहीं जाकर उलझाया… किस्मत, टाइम… या मेरी गलती है…? हर बार क्यों यही कहानी दोहराई है…? नाम लिया तो साँस थोड़ी सीधी हुई… भीतर की भाग-दौड़ थोड़ी धीमी हुई… [Chorus – deeper] जब भी सब बिगड़ता गया… “राधे” नाम थामता गया… जो किसी से कह ना पाया… वो नाम में ही बहता गया… राधे… राधे… राधे… राधे… राधे… राधे… [Spoken – truth] मुझे जवाब नहीं चाहिए… बस… सहारा चाहिए… टूटूँ नहीं… बस इतना चाहिए… राधे… अब तुम संभाल लो… [Bridge – soft] अजीब है… हालात वैसे ही हैं… पर दिल थोड़ा हल्का है… शायद… तुम सुन रहे हो… [Final Chorus – peak] जब भी सब बिगड़ता गया… “राधे” नाम थामता गया… हालात नहीं बदले पहले… मैं अंदर से संभलता गया… राधे… राधे… राधे… राधे… राधे… राधे… [Outro – fade] राधे… राधे… राधे…