
सात फेरों के ये वादे हैं
सात फेरों के ये वादे हैं जनम-जनम के इरादे हैं (सात फेरों के ये वादे हैं) (जनम-जनम के इरादे हैं) एक दूजे में अब हम दोनों रब से भी ज़्यादा पास हैं दिल से दिल की ये डोर बंधी अब एक ही अपनी सांस है (पास हैं... पास हैं...) अग्नि को साक्षी माना है नया सफर ये पहचाना है हाथों में हाथ जो आया है खुशियों ने घर बसाया है सदियों का साथ निभाएंगे हर दुख में भी मुस्कुराएंगे एक दूजे में अब हम दोनों रब से भी ज़्यादा पास हैं... सात फेरों के ये वादे हैं जनम-जनम के इरादे हैं एक दूजे में अब हम दोनों रब से भी ज़्यादा पास हैं... बाबुल की गलियां छूट गईं आँखों में यादें छूट गईं सजना की प्रीत जो मिलनी है जीवन की कली अब खिलनी है मिली है दुआओं की सौगात अब हर पल तेरा ही साथ एक दूजे में अब हम दोनों रब से भी ज़्यादा पास हैं... सात वचन, सात ये फेरे अब से हम हैं सिर्फ तेरे सिर्फ तेरे... सिर्फ तेरे... जनम-जनम के ये डेरे...

