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ASMD ख्वाजा मेरे… चार साल का दर्द मिटा

V5.5

[Intro – Soft harmonium, sarangi, dholak, manjira – 10 seconds] [Spoken – Strong, natural male voice, pain in tone] चार साल से तौफीक का बेटा हमज़ा बिस्तर पर पड़ा है। न उठ पाता है, न बोल पाता है। बस बुखार और बेहोशी। तौफीक हर शहर भागा – दिल्ली, मुंबई, लखनऊ। बड़े-बड़े डॉक्टरों को दिखाया। हर बार एक ही जवाब – “कोई इलाज नहीं है, अब आप उम्मीद छोड़ दीजिए।” बीवी रात-रात रोती है। तौफीक मस्जिद में जाकर दुआ माँगता है, पर कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर एक दिन, रास्ते में एक बुज़ुर्ग मिला। बोला – “तू अजमेर शरीफ जा। वहाँ ख्वाजा गरीब नवाज़ का दर है। जो भी वहाँ हाथ पसारता है, वो खाली नहीं लौटता।” तौफीक ने अपने बीमार बेटे को गोद में उठाया और चल पड़ा अजमेर। [Singing – Full energy, dholak, harmonium, sarangi groove] ख्वाजा मेरे… ख्वाजा मेरे… बेटे की दुआ तू ही सुन ले, रो-रो के आया हूँ जितने डॉक्टर थे, सब कह गए – अब कोई दवा नहीं तेरे दर पे आया हूँ, अब तो बस तेरी दुआ ही सहारा ख्वाजा मेरे… गरीब नवाज़ बीमारी को हर दे, मेरा बेटा बचा ले आज (Dholak and manjira speed up – 10 seconds instrumental) [Spoken – Passionate, energetic male voice, like crying out] तौफीक दरगाह पहुँचा। उसने चादर चढ़ाई, फातिहा पढ़ी, और हाथ उठाकर रो पड़ा। बोला – “ख्वाजा मेरे… चार साल से मैं डॉक्टर-दवा के चक्कर में भटक रहा हूँ। हर किसी ने कहा – अब कुछ नहीं हो सकता। लेकिन तू वो है जिसके दर पर कोई नाउम्मीद नहीं लौटता। मेरा बेटा हमज़ा तेरे भरोसे है। बस एक बार अपनी नज़र कर दे।” फिर वह दरगाह के आँगन में ही सो गया। उसी रात उसने सपना देखा। ख्वाजा खुद आए, उन्होंने हमज़ा के सिर पर अपना हाथ रखा और बोले – “तौफीक, तू फिक्र मत कर। तेरा बेटा मेरी अमानत है। सुबह होते ही वो ठीक हो जाएगा।” [Singing – Even stronger, heavier dholak, crisp manjira] ख्वाजा मेरे… तूने सपने में छू लिया चार साल का दर्द एक रात में ढूँढ़ लिया सुबह हुई तो हमज़ा ने आँख खोली बोला – “अब्बू, मुझे भूख लगी है” चार साल बाद वो हँसा, चार साल बाद वो बोला तौफीक रो पड़ा, दरगाह को दौड़ा ख्वाजा मेरे… डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे ख्वाजा मेरे… तूने मेरे बेटे को जीवन दे दिए (Sarangi and bansuri fill – 10 seconds) [Spoken – Emotional, voice shaking slightly, tearful] तौफीक दरगाह के दरवाज़े पर गिर पड़ा। कहने लगा – “ख्वाजा मेरे… चार साल तक मैं तेरे दर से दूर भटकता रहा। डॉक्टरों ने कहा था – कोई उम्मीद नहीं। लेकिन तूने सिर्फ एक नज़र में सब बदल दिया। अब मेरा बेटा फिर से हँसता है, फिर से खाता है। तेरे सिवा मेरा कोई नहीं। बस यही दुआ है – तू सबके बीमार बच्चों को ऐसे ही देख ले।” [Singing – Climax, full Jagran energy, male vocal power] ख्वाजा मेरे… ख्वाजा मेरे… तेरे दर ने सिखा दिया – माँगना क्या चीज़ है तूने बिना दवा के दे दिया, सपने में आके छू दिया हर बीमारी को हर दे, हर ग़म को मिटा दे ख्वाजा मेरे… चार साल का दर्द एक रात में मिटा ख्वाजा मेरे… तू सुल्तान, तू दुआ, तू दवा, तू ही सहारा (Instrumental peak – harmonium, sarangi, dholak, manjira – 15 seconds, then slow) [Outro – Soft male voice, elongated Khwaja mere Khwaja, no instr] ख्वाजा मेरे… ख्वाजा मेरे… हमज़ा फिर से हँसने लगा तेरी दरगाह का सहारा मिल गया अब तो बस यही है – ख्वाजा मेरे ख्वाजा ख्वा-जा-मे-रे-ख्वा-जा…