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धरती का प्रेम

[Verse] धरती पे जब पग रखते चाँदनी रात जहां मिलते वो क्षण प्रेम से भर देते सपनों में रंग भर देते [Verse 2] वो जीवन के हैं अनुभव वो जोड़ते टूटी डोर पुनः जीवन की गुत्थि सुलझाते प्रेम धागों से बुन देते [Chorus] धरती का प्रेम जो संभावित है वहीं मिलता है हर दर्द वो सहते हैं हर खुशी पर आंखें भर रखते [Bridge] धरती पे जब पग रखते धीरे धीरे प्रति कदम रखते वो क्षण प्रेम से भर देते धरती का प्रेम [Chorus] धरती का प्रेम जो संभावित है वहीं मिलता है हर दर्द वो सहते हैं हर खुशी पर आंखें भर रखते [Verse] धरती के प्रेम बिना जीवित रहोगे पर जीवन जी न पाओगे धरती पे स्वच्छंद विचरोगे मगर किसी के उद्योग ना लजाओगे