
[Matla] नज़र जब उठाऊँ, निगाहों में तुझे ही देखूँ मूँदूँ जो पलकें, सपनों में तुझे ही देखूँ [She’r 1] बसे जबसे हो दिल के आशियाने में हर एक ख़ामोशी की सदा में तुझे ही देखूँ [She’r 2] गया साँस बनके जो अंदर तू मेरे रुकूँ साँस रोके, साँसों में तुझे ही देखूँ [She’r 3] चलूँ साथ तेरे मैं हर एक डगर पर जुदा हो न पल भर, साए में तुझे ही देखूँ [Makta] अँधेरे मिटाने को जो नूर आया छुपा ‘रवि’, तो मैं बना कवि — शे'रों में तुझे ही देखूँ

