कितनी निर्मम है ये तक़दीर, पल भर में संसार बिखेर गई। हाथों की गर्माहट छीनकर, आँखों में उम्रभर की नमी भर गई। जो कल तक साँसों की धुन था, आज ख़ामोशी का सफ़र है। मोहब्बत आज भी ज़िंदा है, बस उसका कोई घर नहीं है। हमने तो मौसम नहीं माँगे थे, बस साथ चलने की राह माँगी थी। दो धड़कनों को एक करने वाली, ज़िंदगी से बस एक पनाह माँगी थी। मगर वक़्त की ठंडी उँगलियों ने, हर अरमान को छूकर तोड़ दिया। जो रिश्ता रूह से लिखा गया था, उसे दुनिया ने पल में मोड़ दिया। कितनी निर्मम है ये तक़दीर, मिलकर भी हमें मिला न सकी। दो चाहतों के जलते दीपक, एक ही हवा में जला न सकी। तेरा नाम आज भी मेरी हर दुआ में उतर आता है। कुछ प्रेम बिछड़कर भी देखो, हर जन्म में लौट आता है। न तुझसे कोई शिकवा है, न तेरे अपने लोगों से। कुछ फ़ैसले इंसानों के नहीं, लिखे जाते हैं समय के संयोगों से। तू जहाँ भी रहे, मुस्कुराती रहना, यही मेरी सबसे बड़ी दुआ रहे। मैं तेरी याद का दीप जलाकर, उम्रभर अपने भीतर जिया करूँ। लोग कहते हैं—समय सब बदल देता है, पर कुछ नाम वक़्त से बड़े होते हैं। जो प्रेम आत्मा में उतर जाए, वो बिछड़कर भी कभी नहीं खोते हैं। यदि कभी किसी शांत शाम में हवा मेरा ज़िक्र ले आए, समझना कोई दूर बैठा आज भी तेरे लिए ख़ामोश दुआएँ गुनगुनाए। मैंने तुझे खोया नहीं है, बस तुझे ईश्वर के हवाले कर दिया। क्योंकि सच्चा प्रेम बाँधता नहीं, प्रार्थना बनकर साथ चलता है। कितनी निर्मम है ये तक़दीर… जिसने मिलन का गीत अधूरा छोड़ दिया। लेकिन प्रेम का सत्य आज भी यही है— जिसे समय मिटा न सके, जिसे दूरी झुका न सके, जिसे संसार बाँट न सके, वही प्रेम अमर कहलाता है।


