हार को केवल हार समझना, इतना भी आसान नहीं, गिरकर फिर उठ जाने वाला कभी ज़िंदगी से हारता नहीं। जीत मिली तो क्या पाया तुमने, दिल अगर खुशहाल नहीं, दुनिया सारी जीत भी लो तुम, मन में अगर उजियाल नहीं। हर सफलता पूर्ण नहीं होती, हर मंज़िल मुकाम नहीं, कुछ अधूरे ख़्वाब ही इंसाँ को देते हैं उड़ने की ज़मीन। मुस्कान सभी की सच्ची नहीं, हर आँसू ग़मगार नहीं, कुछ हँसी के पीछे दर्द छुपा है, कुछ आँसू में हार नहीं। मिलना भी तो सदा नहीं रहता, बिछड़ना भी अंत नहीं, कुछ रिश्ते दूर होकर भी दिल से होते जुदा नहीं। दर्द मिला तो दर्द ही समझो, लेकिन उससे टूटो नहीं, रात भले कितनी गहरी हो, सुबह से रिश्ता तोड़ो नहीं। ठोकर को तुम दोष न देना, राह दिखाती ठोकर है, गिरना कोई अंत नहीं है, उठना ही तो जीवन है। जो खोया उसका शोक न करना, जो पाया उसका मान करो, कल की चिंता छोड़ मुसाफ़िर, आज को अपना नाम करो। हँसना सीखो, रोना सीखो, दोनों जीवन के रंग हैं, सुख-दुःख दोनों साथ चलें तो तभी सफ़र के ढंग हैं। जब तक साँसें चलती हैं दिल में, तब तक कोई अंत नहीं, याद रखो इस बात को— हार केवल हार नहीं।


