सब कुछ दुनिया ने छीन लिया तो क्या, एक सच है जिसे ज़माना मिटा नहीं सकता। वक़्त चाहे जितनी करवटें बदल ले, दिल का आईना झूठ दिखा नहीं सकता। आँधियाँ लाख रास्ते रोक लें, विश्वास का दीप बुझा नहीं सकता। झूठ की परछाइयाँ घेर लें चाहे, सच का सूरज डूबा नहीं सकता। टूट गए हों ख़्वाबों के कारवाँ, सूख गए हों आँखों के सारे दरिया। रूह पर लिखी मोहब्बत की दास्ताँ, कोई मौसम मिटा नहीं सकता। बिछड़ गए अपने, बदल गए चेहरे, ज़िंदगी ने कितने इम्तिहान दिए। सच्चे दिल से किया हुआ एहसास, कोई तक़दीर भुला नहीं सकती। फूल मुरझा जाएँ तो क्या हुआ, उनकी ख़ुशबू हवाओं में रहती है। इंसान चला भी जाए दुनिया से, उसकी नेकी हमेशा ज़िंदा रहती है। सब कुछ दुनिया ने छीन लिया तो क्या, एक सच है जिसे ज़माना मिटा नहीं सकता। जिस दिल में सच्चाई और मोहब्बत बसती हो, उसे कोई ताक़त कभी हरा नहीं सकता।


