काले जल में तैरता है एक साया, गहरा, शांत सितारों से भरी है रात और वो मगरमच्छ जागता है चाँदी जैसे लहरों पर उसकी पीठ पर अंधेरा है हर चमकती आत्मा को वो धीरे से बुलाता है सितारों का शिकारी है वो रातों का राजा, सन्नाटा उसका घर जिसे वो छू ले, वो खो जाए उसकी आँखों में है एक और संसार साँसों की गूंज सुनाई नहीं देती बस दिल की धड़कन रुकती है जब वो काला मगरमच्छ सपनों में उतर आता है सितारों का शिकारी है वो चुपचाप आत्माओं को छीनता है हर तारा जो टूटता है आसमान में शायद वो किसी की आख़िरी चाहत था