
[जय माँ दुर्गा] [नवदुर्गा एवं श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तुति] [आलाप — मधुर, भक्तिमय स्वर] हे माँ दुर्गा, जगज्जननी, आद्यशक्ति, महामाया। नव रूपों में आओ माँ, मन में ज्योति जगाओ माँ। तेरे पावन नामों से, गूँजे धरती और आकाश। जय अम्बे, जय जगदम्बे, पूर्ण करो मन की आस॥ [ध्रुवपद — हर अंतरे के बाद] जय जय दुर्गा, जय जय भवानी, जय जगदम्बा माँ। तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, जय जय अम्बे माँ॥ एक सौ आठ पावन नाम, हृदय में बसाऊँ माँ। नवदुर्गा की महिमा गाऊँ, जय जय दुर्गा माँ॥ [अंतरा १ — नाम १–९] सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी। आर्या, दुर्गा, जया, आद्या, जय माँ जगत्-जननी॥ [अंतरा २ — नाम १०–१८] त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, पिनाकधारिणी, चित्रा। चण्डघण्टा, महातपा, मन, बुद्धि, अहंकारा॥ [अंतरा ३ — नाम १९–२७] चित्तरूपा, चिता, चिति, सर्वमन्त्रमयी माता। सत्ता, सत्यानन्दरूपिणी, अनन्ता, भविनी, भव्या॥ [अंतरा ४ — नाम २८–३६] भव्या, अभव्या, सदागति, शाम्भवी, देवमाता। चिन्ता, रत्नप्रिया, सर्वविद्या, दक्षकन्या, जय माता॥ [अंतरा ५ — नाम ३७–४५] दक्षयज्ञविनाशिनी, अपर्णा, अनेकवर्णा, पाटला। पाटलावती, पट्टाम्बरपरिधाना, कलमञ्जीररञ्जिनी, अमेयविक्रमा, क्रूरा॥ [अंतरा ६ — नाम ४६–५४] सुन्दरी, सुरसुन्दरी, वनदुर्गा, मातंगी। मातंगमुनिपूजिता, ब्राह्मी, माहेश्वरी, ऐन्द्री, कौमारी॥ [अंतरा ७ — नाम ५५–६३] वैष्णवी, चामुण्डा, वाराही, लक्ष्मी, पुरुषाकृति। विमला, उत्कर्षिणी, ज्ञाना, क्रिया, जय माँ शक्ति॥ [अंतरा ८ — नाम ६४–७२] नित्या, बुद्धिदा, बहुला, बहुलप्रेमा, माँ। सर्ववाहनवाहना, निशुम्भ-शुम्भहननी। महिषासुरमर्दिनी, मधुकैटभहन्त्री, चण्डमुण्डविनाशिनी, जय जय दुर्गा भवानी॥ [अंतरा ९ — नाम ७३–८१] सर्वासुरविनाशा, सर्वदानवघातिनी। सर्वशास्त्रमयी, सत्या, सर्वास्त्रधारिणी। अनेकशस्त्रहस्ता, अनेकास्त्रधारिणी। कुमारी, एककन्या, जय अम्बे कल्याणी॥ [अंतरा १० — नाम ८२–९०] कैशोरी, युवती, यति, अप्रौढ़ा, प्रौढ़ा। वृद्धमाता, बलप्रदा, महोदरी, मुक्तकेशी। तेरी महिमा अपरम्पार, तेरी शक्ति महान। जय जय अम्बे, जय जगदम्बे, करती सबका कल्याण॥ [अंतरा ११ — नाम ९१–९९] घोररूपा, महाबला, अग्निज्वाला, रौद्रमुखी। कालरात्रि, तपस्विनी, नारायणी, भद्रकाली। विष्णुमाया, हे जगदम्बे, महिमा तेरी न्यारी। भक्तों के मन में बसती, माँ दुर्गा सुखकारी॥ [अंतरा १२ — नाम १००–१०८] जलोदरी, शिवदूती, कराली, अनन्ता। परमेश्वरी, कात्यायनी, सावित्री, प्रत्यक्ष रूपा। ब्रह्मवादिनी, जय जगदम्बे, तेरी महिमा गाऊँ। एक सौ आठ पावन नाम, मन में सदा बसाऊँ॥ [विशेष अंतरा — नवदुर्गा के नौ रूप] शैलपुत्री प्रथम स्वरूप, ब्रह्मचारिणी द्वितीय। चन्द्रघण्टा तृतीय रूप, कूष्माण्डा चतुर्थ देवी॥ स्कन्दमाता पंचम रूप, कात्यायनी छठी माता। कालरात्रि सप्तम रूप, महागौरी अष्टम माता॥ सिद्धिदात्री नवम रूप, नवदुर्गा जय जय। नौ रूपों की महिमा गाऊँ, माँ रखना अपनी छाया॥ [अंतिम ध्रुवपद — भव्य समापन] जय जय दुर्गा, जय जय भवानी, जय जगदम्बा माँ। तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, जय जय अम्बे माँ॥ एक सौ आठ पावन नाम, हृदय में बसाऊँ माँ। नवदुर्गा की महिमा गाऊँ, जय जय दुर्गा माँ॥ जय माँ दुर्गा! जय माँ भवानी! जय जगज्जननी!

