
– आपको देखा, तो दिल खुश हुआ, एक ख़याल-सा यूँ मन में आया; क्या तुम एक दिन, मेरे हो सकते हो? – आपको देखा तो हम अपने को यूँ भूले, एक अनजान, अजनबी-सा पागलपन उभर कर बाहर आया! – सोचूँ मैं क्यों पड़ गए हम, यह कैसे होगा, वो कैसे होगा तुमने अगर ना कर दी तो, फिर क्या होगा! – तुमको पाने के ख़यालों ने हमको कुछ ऐसी असमंजस में डाल दिया; सोचा कैसे तुम्हें अपना बना लैं फिर यूँ ही ऐसे ख़याल आया? ⸻ पहला कदम क्या उठाएँ? नज़रों में नज़रें डालें; या हाथ को तुम्हारे हाथ में लेकर मोहब्बत का इज़हार करें! – या पहले तुमको मिलें गुफ़्तगू करें, तारीफ़ें करें; तुम्हारे हुस्न की तुम्हारी जवानी की! – या पूछें तुमसे तुम्हारी कहानी, तुम्हारे अरमान और कैफ़ियत तुम्हारी! – फिर अपने दिल से ये हमने कुछ ऐसा पूछा; क्या हिम्मत है मियाँ इज़हार करने की। ⸻ – फिर एक दिन जब तुमको देखा जब आँखें चार हुई तो एहसास आया तुम भी हमारी और देख रहे थे कुछ शर्मीले अंदाज़ से! – फिर हमने ठाना आज तो बात ज़रूर होगी, बातें ज़रूर होंगी तुम्हारी और हमारी! – आँखों में तुम्हारी जब झाँका हमने एक शबाब देखा होंठों पर तुम्हारे प्यार था और चेहरे पर थी इक मीठी सी मुस्कान। – प्यार के हाथ जब हमने आगे बढ़ाया तुम्हारे हाथ को छू कर आानदं आया फिर दोस्ती बनाई हमने तुमसे देखा जब तुमको, तो बहुत प्यार आया!

