आज दिल को दुखाया क्यों तुमने, आज दिल को दुखाया क्यों, दो घड़ी बात करनी थी — ठुकराया क्यों। हम तो बैठे थे बस हाल सुनने को, दिल की हर एक धड़कन को सुनने को, बात दिल की मगर तुमने छुपाया क्यों। शायद अंदर से तुम भी परेशान हो, चेहरे पर फिर भी मुस्कान मेहरबान हो, अपनी आँखों और माथे को, दबाया क्यों। किसने तुमसे ये बेरुख़ी की आज फिर, किसने दिल को तुम्हारे दुखाया है फिर, नाम उसका हमें तुमने न बताया क्यों। अपने ग़म को कभी यूँ छुपाया न करो, दिल में जो भी है हमको बताया करो, हम पे ऐतबार करने से घबराया न क्यों। वादे करते थे तुम साथ निभाने के, साथ हर मोड़ पर मुस्कुराने के, फिर वही रास्ता आज भुलाया क्यों। जो लोग पीठ पीछे बुराई करें, नाम लेकर तुम्हारा शिकायत करें, उनकी बातों पे तुमने भरोसा किया क्यों। एक दिन सच सभी के सामने आएगा, झूठ का हर नक़ाब उतर जाएगा, दिल को यूँ झूठ की आग में जलाया क्यों। हम तो हर दर्द में साथ देने को थे, ज़िंदगी की हर राह में चलने को थे, फिर हमें अपनी महफ़िल से हटाया क्यों।