
देख कर आपको, दिल बेकरार हो गया, चुपके चुपके हमको भी, प्यार हो गया। नज़्रें उठीं तो ठहर-सा गया, था जहाँ, एक लम्हे में, सब इज़हार हो गया। सोचा बहुत, कि दिल की कहें दास्ताँ, लब हिले तो जैसे, इनकार हो गया। धड़कनों ने जब लिया, नाम आपका, रूह तक में मीठा सा, ख़ुमार हो गया। ख़्वाब में भी आप, ही आते रहे, हर समाँ जैसे, ख़ुशगवार हो गया। रास्ता देखा किए, करते रहे हम उम्र भर, आप आए तो सफ़र, आसान हो गया। दिल की बस्ती सूनी-सूनी थी मगर, आप आए तो चमन गुलज़ार हो गया। हाथ थामा जब, नज़र की राह से, ख़ामुशी में भी बड़ा, इज़हार हो गया। इक झलक ने, कर दिया ऐसा असर, सादा दिल भी, आज फ़नकार हो गया। रंज था जो दिल में, बरसों से बरपा, आप हँसे तो, सब ग़ुबार हो गया। इंतज़ार-ए-शाम में बीती थी उम्र, आप आए तो दिल, ख़ुशगवार हो गया। नाम लिखकर आपका दिल पर ‘जसु’, दर्द भी उसका, सितार हो गया। अब दुआ बस ये, रहे हर मोड़ पर, आपका होना ही, संसार हो गया।

