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ASM तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी

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(मुखड़ा) तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आना पड़ेगा। जो डूबा नहीं इश्क़ के दरिया में, उसे प्यार का मतलब जाना पड़ेगा॥ (अंतरा 1) दिल की बस्ती में एक दीवाना बसता है, जो रात-दिन बस तेरा नाम जपता है। न घर है उसे, न कोई ठिकाना है, बस इश्क़ की राह पर चलता जाना है। जो खोया है खुद को तेरी चाह में, वो पाया है सब कुछ अल्लाह की राह में। तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आना पड़ेगा॥ (सूफ़ियाना कलाम — धीमा भाग) इश्क़ वो आग है जो जलाती भी है, इश्क़ वो नूर है जो जगाती भी है। फ़कीरों ने जाना है सदियों से यह राज़, मोहब्बत में ही छुपा है ख़ुदा का आवाज़। जो झुक जाए वो ही सरताज होता है, प्रेम में डूबा दिल ही आबाद होता है॥ (अंतरा 2) ना मस्जिद में मिला, ना मंदिर में पाया, दिल के अंदर ही उसने डेरा लगाया। सूफ़ी कहते हैं — प्रेम ही इबादत है, इंसान से इंसान का प्यार ही सच्ची रिवायत है। तोड़ दे दीवारें जो दिलों को बाँटती हैं, मोहब्बत की राहें ही जन्नत तक जाती हैं। तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आना पड़ेगा॥ (जोश वाला भाग — तेज़ आवाज़ में) अल्लाह हू… अल्लाह हू… अल्लाह हू… अल्लाह हू… इश्क़ ही सच्चा धर्म है भाई, इश्क़ में ही है ख़ुदा की परछाई। गाओ क़व्वाली, झूमो सब मिलकर, दिल से पुकारो — या अल्लाह… या अल्लाह॥ (अंतिम मुखड़ा — धीमे से तेज़) तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत की राहों में आना पड़ेगा। जो डूबा नहीं इश्क़ के दरिया में, उसे प्यार का मतलब जाना पड़ेगा॥ अल्लाह हू… अल्लाह हू… या अल्लाह… या अल्लाह… अल्लाह हू॥