
[Intro] (Soft, soul-soothing instrumental with gentle acoustic guitar, flute, and piano) [Verse 1] प्रभु तेरे पावन भवन में कौन आएगा? तेरी महिमा के प्रकाश में कौन छाएगा? जो चलता है सीधी राह पर हर दिन, जिसका मन पवित्र है पापों के बिन। [Chorus] जो दिल से सदा ही सच बोलता है, ना औरों की निंदा में मुँह खोलता है। जो दूर रहे अभिमान और पाप से, प्यार करे पड़ोसी को अपने आप से। [Verse 2] जो आदर करे उनका, जो तुझसे डरते, पूरे करें वादे, जो कभी ना मुकरते। चाहे हो नुकसान, ना वचन वो तोड़ें, तुझ पर ही विश्वास, ना संग तेरा छोड़ें। [Chorus] जो दिल से सदा ही सच बोलता है, ना औरों की निंदा में मुँह खोलता है। जो दूर रहे अभिमान और पाप से, प्यार करे पड़ोसी को अपने आप से। [Bridge] जो बिना ब्याज धन दे लाचार को, रिश्वत से ना बेचे वो अधिकार को। जो इन सब बातों पर करता है अमल, वो रहेगा हमेशा ही दृढ़ और अटल। [Instrumental Solo] (Lively, uplifting, and emotional melody with Indian flute and acoustic guitar) [Chorus] जो दिल से सदा ही सच बोलता है, ना औरों की निंदा में मुँह खोलता है। जो दूर रहे अभिमान और पाप से, प्यार करे पड़ोसी को अपने आप से। [Outro] तेरी बाहों में हम, सदा रहें अटल, तेरे पावन भवन में बीते हर पल। प्रभु, सच्चे मन से हम करें तेरी भक्ति, तेरी ज्योति में चलने की दे हमें शक्ति। [Ending] (Fading out softly on a gentle flute melody and a single piano chord)

