
[Intro – Sarangi & Harmonium | 6–8 sec] [Chorus] आरज़ू है वफ़ा करे कोई जी न चाहे तो क्या करे कोई [Verse 1] गर मर्ज़ हो दवा करे कोई मरने वाले का क्या करे कोई [Chorus] आरज़ू है वफ़ा करे कोई जी न चाहे तो क्या करे कोई [Verse 2] कोसते हैं जले हुए क्या-क्या अपने हक़ में दुआ करे कोई [Verse 3] उनसे सब अपनी-अपनी कहते हैं मेरा मतलब अदा करे कोई [Chorus] आरज़ू है वफ़ा करे कोई जी न चाहे तो क्या करे कोई [Verse 4] तुम सरापा हो सूरत-ए-तस्वीर तुमसे फिर बात क्या करे कोई [Verse 5] जिसमें लाखों बरस की हूरें हों ऐसी जन्नत का क्या करे कोई [Outro – Chorus] आरज़ू है वफ़ा करे कोई जी न चाहे तो क्या करे कोई

