
[Verse 1] मैं दिनभर बस अंडरवियर में था, सोशल पन्नों पर दुनिया को देखा था। कुछ जगहें दिल में चुन ली मैंने, कल से ज़िंदगी फिर नई लिखने। [Verse 2] बचपन से सपनों में खोए हैं हम, बादलों के क़िले बनाए हैं हम। पर ज़िंदगी से कभी नहीं सीखा, जो चाहा है, वो कैसे पाना सीखा। [Verse 3] उनको तो सब कुछ मिलता है, मेरे हाथ में कुछ भी नहीं रहता है। वे तो उड़ते हैं, मैं नीचे गिरा, मेरी जेब में एक सिक्का भी नहीं बचा। कुछ नहीं, कुछ नहीं। [Verse 4] शायद किसी दिन देखूँगा मैं, किधर जाना है, किस राह पर चलना है। दिमाग़ में एक क्रांति उठेगी, दीवारों में मेरी किताब जगेगी। [Chorus] मैं फिर वादा करता हूँ उठने का, पर बिस्तर से उठ नहीं पाता हूँ। हफ़्ते भर की योजनाएँ बनाता हूँ, पर कल से तुम मुझे बदलते देखोगे। मैं फिर वादा करता हूँ उठने का, पर बिस्तर से उठ नहीं पाता हूँ। हफ़्ते भर की योजनाएँ बनाता हूँ, पर कल से तुम मुझे बदलते देखोगे। मैं। (तुम देखोगे मुझे, कल से) मैं। (कल से शुरू, कल से शुरू)


