पूरे अवध में डंका बाजे, चले हमारा राज हो, आँख उठा के जे देखे, उनका खुलेयाम इलाज हो! गाड़ी पर फोर-फॉटी, पीछे यार आवे चार गो, शहर भर में चर्चा बाटे, हमार भौकाल हो! अंतरा 1 न पुलिस से डरें, न कूनो थानेदार से, हमरा टक्कर लेवे के ना दम कूनो सरकार में। नाम सुन्ते कांपे छाती, दुश्मन छुप जात हैं, जे हमसे बैर मोल्हिन, उ माटी में मिल जात हैं। अंतरा 2 हाथ में कड़ा अउर सीना टान के चलित हैं, दुश्मन के छाती पर हम मूंछ तावित हैं। अवध की इ माटी जाने, शेर कउन कहाला, रंगदारी के चर्चा अब घर-घर होला!