
RBSM काल भी थर-थर कांपे | Mahakal Bhajan 2026
भस्म रमी है अंग पे जिसके गले सांप की माला है काल भी उससे थर थर कांपे वो मेरा डमरू वाला है शमशानों का राजा वो है भक्तों का रखवाला है पीकर विष का प्याला उसने जग को बचाने वाला है काल उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का अरे काल उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का मृत्यु लोक के राजा पर साया है विकराल का जय जय श्री महाकाल जय जय श्री महाकाल जटा से बहती गंगा मैया माथे सोहे चंदा है काट दे सारे जग के बंधन ऐसा शिव का फंदा है अघोरी वो संन्यासी वो वो ही तो अविनाशी है कण कण में है वास उसी का वो ही घट घट वासी है सुनो रे दुनिया वालों जब उसका डमरू बजता है ब्रह्मांड डोलने लगता है जब उसकी तीसरी आँख खुले पापी का सीना फटता है अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का काल भी उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का जय महाकाल जय जय महाकाल जय महाकाल जय जय महाकाल बम बम भोले बम बम भोले उज्जैन की नगरी डोले जब महाकाल की सवारी निकले हर जुबां पे एक ही नारा जय शम्भू जय शंकर महाकाल महाकाल महाकाल

