हूँ… ओ… तेरी याद की ख़ुशबू आज भी साँसों में बसती है… प्यार बदल गया, मगर तेरा सम्मान नहीं। तू दूर हो गया, पर दिल कभी अनजान नहीं। तेरी हर मुस्कान की आज भी दुआ करता हूँ, तू मेरी न सही, फिर भी तेरा बुरा नहीं सोचता हूँ। सपनों की राहों पर हम साथ चला करते थे, छोटी-छोटी खुशियों में अपना जहाँ बसा करते थे। किस्मत ने ऐसा मोड़ दिया, हाथों से हाथ छूट गए, यादों के सारे दीप मगर दिल में आज भी जलते रहे। प्यार बदल गया, मगर तेरा सम्मान नहीं। दिल टूट गया मेरा, मगर कोई इल्ज़ाम नहीं। तेरे नाम की ख़ामोशी आज भी गीत बन जाती है, भीगी हुई हर शाम तेरी याद दिला जाती है। अगर तू खुश है कहीं, यही मेरी जीत रहे, मेरे हिस्से दर्द सही, तेरे हिस्से प्रीत रहे। सच्चा प्यार कभी नफ़रत लिखना नहीं जानता, जो दिल से सम्मान करे, वो रिश्ता कभी मरता नहीं। प्यार बदल गया, मगर तेरा सम्मान नहीं। ज़िंदगी बदल गई, मगर मेरा ईमान नहीं। अगर कभी याद आऊँ मैं, बस मुस्कुरा देना तुम, मेरी मोहब्बत की यही आख़िरी पहचान सही… हूँ… ओ… तेरी खुशियों में ही मेरी दुआ बसती रहे…


