(Mukhda) नज़रों में अपनी छुपाया है तुमको दिल की धड़कन बनाया है तुमको कह न सके जो जुबाँ से कभी ख्वाबों में अपना बताया है तुमको (Mukhda) (Antara 1) दूर से तुमको देखा करें हम बस इसी आस में जी रहे हैं होठों पे आती है बात मगर खामोश घूँट हम पी रहे हैं (Antara 1) (Mukhda) नज़रों में अपनी छुपाया है तुमको दिल की धड़कन बनाया है तुमको कह न सके जो जुबाँ से कभी ख्वाबों में अपना बताया है तुमको (Mukhda) (Antara 2) तेरी राहों में नज़रें बिछाए चुपके से हम तो आहें भरें डर है कहीं तुम बुरा न मानो कैसे मोहब्बत का इकरार करें (Antara 2) (Mukhda) नज़रों में अपनी छुपाया है तुमको दिल की धड़कन बनाया है तुमको कह न सके जो जुबाँ से कभी ख्वाबों में अपना बताया है तुमको (Mukhda)