
अस्सोब्हु बदा (Al-Subhū Badā) [पहला बंद] अस्सोब्हु बदा मिन त़लअतिही, वल्लैलो दजा मिन वुफ़्रतिही। मुबारक है नूर-ए-सहर तेरे, और शब की रौनक़ ज़ुल्फ़ों से। [मुखड़ा/धुर] अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु। [दूसरा बंद] फ़अश्हदु अन्नक ख़ैरुल-वरा, या मुस्त़फ़ा या मुअ़्तमदी। करम की वो मंज़िल है मौला, ने'मत का ख़ज़ाना है आक़ा। हमीम-ए-शरीअ़त उम्मत का, और रहनुमा है तरीक़त का। [मुखड़ा/धुर] अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु। [तीसरा बंद] शजर-ओ-हजर सर ख़म करते, उंगली के इशारे पे चले। राज़ से पत्थर बोल उठे, और चाँद हुआ है दो टुकड़े। [मुखड़ा/धुर] अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु। [चौथा बंद] जिब्रील-ए-अमीं पैग़ाम-ए-ख़ुदा लेकर, आए थे शब-ए-इस्रा। अल्लाह ने अ़र्श पे बुलवाया, क़ुर्बत का शरफ़ उनको बख़्शा। [मुखड़ा/धुर] अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु हुव, अल्लाहु।

