
[Intro — Soft Naam-Kirtan Atmosphere] हरि... हरि... हरि बोल... हे कृष्ण, हे करुणामय... तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ, हे प्रभु, रखना सदा अपनी शरण में... [Verse 1] दिन ढलते ही संध्या आए, तेरा नाम मैं गाऊँ; संसार की थकान और दुख में, तेरे चरणों में शांति पाऊँ। हे प्रभु, मेरी भूल क्षमा करना, सन्मार्ग का ज्ञान देना; मेरे मन के भीतर हर पल, भक्ति का दीप जला देना। [Chorus] हे कृष्ण, हे दयामय, तेरे चरणों में स्थान मिले; हरि नाम की पावन धुन से, मेरे मन को शांति मिले। जय गुरु शंकर, जय गुरु माधव, तुम्हारी सीख मेरा प्राण; एक शरण में तुझको भजूँ, मुख पर रहे सदा हरि नाम। [Verse 2] हर घर में सुख-शांति देना, सबका मंगल हो; दुखियों के आँसू पोंछे जग, हर हृदय में करुणा हो। अहंकार का अँधियारा हरकर, दया-धर्म का प्रकाश देना; सुख-दुख में तुझको याद करूँ, भक्ति में जीवन बिताने देना। [Bridge — Soft Devotional Humming] हरि... हरि... हरि बोल... कृष्ण... कृष्ण... दयामय... तेरे नाम में मन खो जाए, तेरे चरणों में मिले आश्रय... [Final Chorus — Gentle and Uplifting] हे कृष्ण, हे दयामय, तेरे चरणों में स्थान मिले; जीवन की अंतिम साँस तलक, तेरा नाम मैं गाता रहूँ। जय गुरु शंकर, जय गुरु माधव, हरि नाम ही सार; तेरे चरणों में अर्पित है, यह जीवन, हे पालनहार। [Outro — Slow Naam-Kirtan Fade] हरि बोल... हरि बोल... श्रीकृष्णार्पणमस्तु...

