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सबके अपने सत्य हैं...

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V6

[INTRO – 0:00–0:25] [Deep Male Spoken] सबके अपने सत्य हैं... सबके अपने झूठ... किसी की खामोशी में कहानी है, तो किसी की बातों में शोर... [Verse 1] सब के अपने सतya हैं और सब के अपने झूठ कोई कहता ना इसे तो किसी को लगती छूट जितना दिखता सामने उतना होता नहीं हर चेहरे के पीछे एक चेहरा और सही [Verse 2] जिसमें महँगा फायदा महँका है नुकसान महँका बढ़ता मान देखकर महँकी चलती जान कोई दौलत में खुश है कोई नाम के साथ कोई जीतता दुनिया पर हारता खुद के साथ [Dialogue 1 – बुद्ध से प्रेरित] "जो दिखाई देता है, वही पूरा सत्य नहीं... कभी-कभी मन का भ्रम सच से भी बड़ा दिखाई देता है।" [Verse 3] किसी ने सच को बेच दिया किसी ने खरीदी शान किसी ने चुप रहकर जीत लिया किसी ने खोया मान किसी को चाहिए ताज किसी को चाहिए सिंहासन किसी को चाहिए दुनिया किसी को चाहिए अपनापन [Verse 4] बाज़ार में बिकते रिश्ते बिकता अपना नाम जिसके पास है पैसा उसका ऊँचा दाम पर वक्त जब करवट ले सब बदल जाता है आज जो राजा बैठा है कल वो भी चल जाता है [Dialogue 2 – कबीर से प्रेरित] "ऊँची आवाज़ से सच ऊँचा नहीं होता... इंसान की पहचान उसके कर्मों से होती है।" [Verse 5] किस्मत अपनी चाल चले इंसान अपनी चाल किसी के हाथ में सोना किसी के हाथ सवाल कोई भीड़ के साथ चला कोई अकेला राह कोई खुद को ढूँढता रहा कोई ढूँढता रहा वाह-वाह [Verse 6] जिसको दुनिया जीतनी थी वो खुद से हार गया जिसने थोड़ा बाँटा जीवन में वो सबसे अमीर हो गया जिसने दिल को बेच दिया उसने महल बनाए जिसने दिल बचा लिया उसने रिश्ते पाए [Dialogue 3 – महात्मा गांधी से प्रेरित] "दुनिया को बदलने की बात बहुत लोग करते हैं... पर असली बदलाव हमारे अपने कर्मों से शुरू होता है।" [Verse 7] नाम बड़ा हो जाए तो सच बड़ा नहीं भीड़ खड़ी हो जाए तो दिल खड़ा नहीं तालियाँ मिल जाएँ तो जीत नहीं होती अपने सामने आँखें झुकें तो हार वही होती [Verse 8] सत्ता के गलियारों में चेहरे बदलते रोज़ आज किसी की जय-जय कल उसी पर दोष कुर्सी आती-जाती है वक्त रहता साथ जो इंसानियत खो बैठे क्या जीती उसने बात? [Dialogue 4 – डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से प्रेरित] "सपना केवल वह नहीं जो आँखें बंद करने पर दिखे... सपना वह है जो आँखें खोलकर रास्ता दिखाए।" [Verse 9] किसी ने आसमान छुआ किसी ने मिट्टी थामी किसी ने दुनिया जीत ली पर खुद से रही अनजानी किसी ने कम में जी लिया किसी ने सब कुछ चाहा जिसको सुकून मिल गया उसने जीवन पाया [Verse 10] हर चेहरा एक किताब है हर दिल एक राज किसी के अंदर मंदिर है किसी के अंदर आग किसी की हँसी के पीछे आँसू छुपे हजार किसी की खामोशी में मिलता सच्चा प्यार [Dialogue 5 – आइंस्टीन से प्रेरित] "सिर्फ उत्तर जानना ही समझदारी नहीं... सही सवाल पूछना भी समझदारी है।" [Verse 11] वक्त किसी का अपना नहीं वक्त किसी का दास आज तेरे हाथ में दुनिया कल दुनिया तेरे पास? जो बोया वो लौटेगा चाहे देर लगे झूठ कितना भी दौड़े सच आगे चले [Verse 12] अंत में सबका हिसाब न दौलत न अभिमान न ताज रहेगा सिर पर न रहेगा ऊँचा नाम जो दिलों में रह गया वही असली निशान जो इंसानियत दे गया वही रहा महान [FINAL DIALOGUE – 4:35–4:55] [Deep Emotional Male Voice] "सच... हर किसी की नज़र में अलग हो सकता है... झूठ... हर किसी के लिए अलग चेहरा रख सकता है... मगर वक्त... वक्त किसी का पक्ष नहीं लेता। वो बस... सबका हिसाब करता है।" [OUTRO – 4:55–5:00] [Low Male Whisper] "आखिर में... बचता वही है... जो दिलों में बचा रहे।" [Instrumental Fade Out]