खिड़की से झांकता वो सूरज का टुकड़ा नीले आसमान का एक सपना धुंधला सा लगता है सांसों में है हल्की ठंडक पलकों पे भारी हैं बादल चले दूर कहीं जहाँ बातें न हों सिर्फ़ खामोशियाँ बस खामोशियाँ पत्तों की सरसराहट जैसे कोई गुनगुना रहा हो हवा के संग बहता एक भूला सा नगमा दिल के किसी कोने में धड़कता है अधूरा सपना चले दूर कहीं जहाँ बातें न हों सिर्फ़ खामोशियाँ बस खामोशियाँ