🎵 "तू ही निरंकार, तू ही आधार" तू ही निरंकार, तू ही आधार, तेरा नहीं कोई पार। गुरु कृपा से पाया तुझको, तू ही जीवन का सार॥ छोटी मेरी बुद्धि प्रभु जी, कैसे तेरा भेद मैं जानूँ। रोम-रोम में वास है तेरा, कैसे तेरा रूप पहचानूँ। ज्ञान की ज्योति जला दो मेरे, मिट जाए अंधकार॥ तू ही निरंकार... मन के तर्क भटका देते, अहंकार राह रोकता है। जो भी तेरे चरणों झुकता, उसका जीवन संवरता है। गुरु वाणी का दीप जलाकर, कर दो भव से पार॥ तू ही निरंकार... चर्म चक्षु से दिखे न कोई, ज्ञान नयन जब खुल जाते। हर प्राणी में, हर कण-कण में, तेरे दर्शन हो जाते। सच्ची श्रद्धा, सच्चा समर्पण, यही मुक्ति का द्वार॥ तू ही निरंकार... जिसका तुझ पर विश्वास अटल हो, डर उसका मिट जाता है। सुख-दुख दोनों तेरी माया, भक्त सदा मुस्काता है। हर पल तेरी याद में जीना, यही हमारा प्यार॥ तू ही निरंकार... हरदेव की वाणी कहती, गुरु से मिलता ज्ञान। निरंकार का बोध हो जाए, सफल बने इंसान। तेरी महिमा गाते-गाते, हो जीवन साकार॥ तू ही निरंकार, तू ही आधार, तेरा नहीं कोई पार। गुरु कृपा से पाया तुझको, तू ही जीवन का सार॥


