मैं तुझमें बसा हूँ ऐसे आँखों में बसे सपने हो जैसे तेरी यादों के संग मैने जीवन बुना है हर पल में तुझे ही मैंने चुना है दूरियां चाहे कितनी भी हों दिल में तू ही तो बसा है आंखों में लम्हा ठहरा हुआ है होठों से लफ्ज़ रूठे हुए है आंखों में लम्हा ठहरा हुआ है होठों से लफ्ज़ रूठे हुए है तेरी चाहत से ही तो रोशन मेरा जहां है वक्त की राहों में फासले जो भी आएँ, मोहब्बत का धागा टूट ना जाए। आंखों में लम्हा ठहरा हुआ है होठों से लफ्ज़ रूठे हुए है आंखों में लम्हा ठहरा हुआ है होठों से लफ्ज़ रूठे हुए है कल की सुबह फिर लौट आएगी, तेरी हँसी मेरी धड़कन सजाएगी। मीलों की दूरियाँ फिर मिट जाएँगी, राहें हमें इक दिन मिलाएँगी। आंखों में लम्हा ठहरा हुआ है होठों से लफ्ज़ रूठे हुए है आंखों में लम्हा ठहरा हुआ है होठों से लफ्ज़ रूठे हुए है मैं तुझमें बसा हूँ ऐसे आँखों में बसे सपने हो जैसे @2025, All Rights Reserved.


