
“क्या यही भविष्य था…”
[Chorus] क्या यही भविष्य था जो हमने सोचा था, एक खामोश बच्चा और टूटता हुआ रास्ता था। [Verse 1] वो किताबों से नहीं, रंगों से बात करता था, उसकी आँखों में भी एक आसमान रहता था। हमने डर के नाम पर पंख काट दिए उसके, और पूछा फिर कि वो क्यों उड़ नहीं पाता था। [Chorus] क्या यही भविष्य था जो हमने सोचा था, हर सवाल के बदले बस फैसला थोपा था। [Verse 2] बड़े शहर की रौशनी, छोटे दिलों का अँधेरा, हर हँसी के पीछे छुपा था कोई अकेला। जो सुन सकता था दर्द, वो मिला ही नहीं, और जो मिले उन्होंने कहा, ये इसका मसला। [Bridge] न उसने बग़ावत की, न कोई गुनाह कहा, बस चुप रहना ही उसकी सबसे बड़ी सज़ा था। [Verse 3] एक कश में उसने सुकून ढूँढने की कोशिश की, किसे पता था ये राहत भी एक साज़िश थी। हम कहते रहे बच्चा संभल जाएगा, और देखते रहे जब ज़िंदगी फिसल गई। [Chorus – Soft] क्या यही भविष्य था जो हमने सोचा था, या हमने ही हर मोड़ पर उसे अकेला छोड़ा था। [Verse 4] अब तस्वीरों में ढूँढते हैं उसकी हँसी, जो ज़िंदा था कभी अब यादों में ही सही। क़ब्र से भी जो सवाल उठकर आता है, बताओ क्या हमने उसे कभी सुना ही नहीं? [Outro – Whisper] क्या यही भविष्य था… या ये हमारी चुप्पी का नतीजा था…

