कलम है तलवार पर भारी, बात सुनने में लगती है प्यारी। पर हकीकत के पलड़े में, और भी है जो कलम पे भारी। कलम है तलवार पर भारी, बात सुनने में लगती है प्यारी। पर हकीकत के पलड़े में, और भी है जो कलम पे भारी। कलम बिक रही पैसे में, दलाल आ गए इस पेशे में। हकीकत न करें उजागर, सच्चाई से वो रखे बेखबर। कलम बिक रही पैसे में, दलाल आ गए इस पेशे में। हकीकत न करें उजागर, सच्चाई से वो रखे बेखबर। चाटुकारिता की चरमसीमा, कलम खो रही खुद की गरिमा। नागिन-नाच सत्ता की बिन पर, फ़र्ज़ीवाड़ा चले दिनभर। चाटुकारिता की चरमसीमा, कलम खो रही खुद की गरिमा। नागिन-नाच सत्ता की बिन पर, फ़र्ज़ीवाड़ा चले दिनभर। पैसा और पावर धौंस जमाए, कलम खुलकर लिख न पाए। गर करें हिमाकत गलती से तो, कलम बेचारी रुख़्सत हो जाए। पैसा और पावर धौंस जमाए, कलम खुलकर लिख न पाए। गर करें हिमाकत गलती से तो, कलम बेचारी रुख़्सत हो जाए। कलम है तलवार पर भारी, बात सुनने में लगती है प्यारी। पर हकीकत के पलड़े में, और भी है जो कलम पे भारी। और भी है जो कलम पे भारी। हो जहन्नममे दलाल पत्रकारी !


