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“उम्मीद का सफ़र”

V4.5-ALL

उम्मीद कभी हमें छोड़कर नहीं जाती, जल्दबाज़ी में हम लोग ही उसे छोड़कर चले जाते हैं। राहों में धुंध हो तो कसूर रास्तों का क्या, नज़र ही हार जाए तो मंज़िलें रूठ जाती हैं। दिल में रखो तो चिराग़ बन के जलती है, बुझा दो ख़ुद ही तो रातें और गहरी हो जाती हैं। सब्र की छाँव में खिलते हैं ख़्वाबों के गुल, जल्दबाज़ी में तो कलियाँ भी बिखर जाती हैं। किस्मत से शिकवा करना आसान बहुत है, मगर कोशिशें ही तक़दीर बदल जाती हैं। उम्मीद तो वही है, हर मोड़ पे साथ चलती, हम ही थककर उसे आधे रास्ते छोड़ जाते हैं।