
[Intro] यमुना जल पर चाँद ठहरा, कदंब डाली धीमे डोली वृंदावन की सूनी गली में, बिन पायल ही मधुर झंकार गूँजी रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… [Verse 1] ठिठके पथिक के पग, रेत पर धुंधले चिह्न उभरे दूर कहीं बंसी धुन गूँजी, पवन में जैसे संदेश उड़े आँचल की ओट में राधा ने दीप सँभाला पवन बही तो लौ थरथराई, फिर आँचल की छाँव में सँवर गई कदंब पत्ती सरकी धीरे दीप की रेखा आगे बढ़ी [Chorus] रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… रुकते पगों के आगे रस्ता खुद जगमगाया… रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… सूनी कुंज गलिन में जैसे, श्याम सलोना उतर आया… [Verse 2] मोड़ पुराना, टूटी देहरी, दीप की छाया चुपके ढली राधा धीमे पग धरती आईं, पीली लौ मुख पर थरथरी चकित नयनों में लौ समाई लौ की दिव्य चमक नैनों में उतरी यमुना किनारे लहर उठी बंसी धुन फिर दूर बही अधर रहे मौन, पर परछाईं सरकी दीप की लौ बस बढ़ती गई [Chorus] रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… रुकते पगों के आगे रस्ता खुद जगमगाया… रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… सूनी कुंज गलिन में जैसे, श्याम सलोना उतर आया… [Bridge] तीव्र पवन में लौ जो काँपी राधा ने आँचल ढाल बनाया कदम-कदम पर छाया टूटी रेत पे उजला घेरा छाया कदंब तले श्यामल छवि उभरी बंसी धुन पवन में घुल गई पग बढ़ते रहे… दीप बढ़ता रहा… रात वहीं थी… पर दिशा बदल गई… [Final Chorus / Outro] रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… रुकते पगों के आगे रस्ता खुद जगमगाया… रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… लौ धीमे-धीमे बढ़ती रही… भटके नैनों में उजियारा भर गया… रात अंधेरी थी… राधा ने दीप जलाया… (धीरे repeat / fade) राधा ने दीप जलाया… राधा ने दीप जलाया…

