[Verse] पन्द्रह अगस्त का दिन आया सबने तिरंगा फहराया पर हकीकतें जो दिखती हैं वो हर दिन हमें सताती हैं [Verse 2] अमीरों की चाँदी गरीबों की रोटी सपनों में भी मुश्किल होती जनता की आवाज़ अनसुनी जाए राजनीति में धक्के खा जाए [Chorus] ये है हिंदुस्तान की सच्चाई न जाने कब दूरेगी तन्हाई आशाएं हैं बड़ी रास्ते पे कटी हर कोई यहाँ लेकिन है फंसी [Verse] शिक्षा की हालत गिरी बिना पैसों की कोई नहीं सुनी सब कहते हैं बदल जाएगा पर बदलाव क्यों नही दिखता [Verse 2] गांव की गलियों में अंधेरा धीरे-धीरे हर दिन बढ़ेगा सपने हुए चकनाचूर आंधी में उड़ा हर दस्तूर [Bridge] हर शहर में है एक ही कहानी मजदूरों की बेबसी सुनानी होगी कभी नई सुबह ये उम्मीद लिए हर दिल रहा


