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Hindi_Psalm17

V6

[Intro] [Acoustic guitar arpeggios with a soft, soulful bansuri melody and warm ambient pads] [Verse 1] सुन ले प्रभु मेरी सच्ची पुकार, तेरे ही द्वारे पे आया ये प्यार। होठों पे मेरे छल का न नाम, सच्चे हृदय से करूँ मैं प्रणाम। [Verse 2] तेरे ही मुख से मिले मुझको न्याय, सच्चाई पर तेरी दृष्टि समाए। रातों में परखा तूने ये मन, पाया है पावन ये सारा जीवन। [Pre-Chorus] तेरी ही राहों पे क़दम बढ़ाऊँ, फिसलूँगा नहीं, कभी डगमगाऊँ। तुझको पुकारूँ, तू उत्तर है देता, कृपा से अपनी तू थाम है लेता। [Chorus] आँखों की पुतली समान मुझे रख, पंखों की छाँव में ढांप मुझे रख। अपने अनुग्रह की शरण तू दे, पावन दया से तू मुझको भर दे। जो भी भरोसा रखें केवल तुझपर, तू ही बचाता उन्हें अपने बल पर। [Verse 3] चारों तरफ जब घिरें अंधेरे, रक्षक बने प्रभु वादे हैं तेरे। शेर समान जो गिराना चाहें, तेरे करम से वे रुक जाएँ राहें। उठ जा पिता और बन जा सहारा, तूने ही टूटे दिलों को सँवारा। [Chorus] आँखों की पुतली समान मुझे रख, पंखों की छाँव में ढांप मुझे रख। अपने अनुग्रह की शरण तू दे, पावन दया से तू मुझको भर दे। जो भी भरोसा रखें केवल तुझपर, तू ही बचाता उन्हें अपने बल पर। [Bridge] [Tempo lifts gently, dynamic build with soaring soulful vocals and warm percussion] दुनिया तो ढूँढे ये दौलत पुरानी, मिट जाएगी यह चमक है दीवानी। तेरी सच्चाई में मुखड़ा निहारूँ, तेरी महिमा को दिल से पुकारूँ! भोर होते ही जब आँख खुलेगी, तेरी सूरत से ही तृप्ति मिलेगी! [Instrumental Interlude] [Melodious acoustic guitar and bansuri duet with uplifting, peaceful percussion] [Chorus] [Full arrangement, joyful and emotional worship] आँखों की पुतली समान मुझे रख, पंखों की छाँव में ढांप मुझे रख। अपने अनुग्रह की शरण तू दे, पावन दया से तू मुझको भर दे। जो भी भरोसा रखें केवल तुझपर, तू ही बचाता उन्हें अपने बल पर। [Outro] [Soft piano and gentle acoustic guitar fading gently] धर्म में देखूँ मैं चेहरा तिहारा, मन हुआ तृप्त, प्रभु नाम तुम्हारा... पंखों की छाँव में... तेरी ही पनाह में... [Fade to end]