
[Intro] या ख़्वाजा... या ग़रीब नवाज़... बारिश बरस रही है... तेरे दरबार में... भीग रही है रूह मेरी... तेरे प्यार में... [Hook] बारिश बरस रही है, तेरे दर पे खड़े हैं दिल के मेरे आँसू भी, इन बूँदों में पड़े हैं भीगे-भीगे सज्दे में, रूह मेरी झुकती है ख़्वाजा तेरी दरगाह से, रहमत ही बरसती है बारिश की हर बूँद में, तेरा नूर चमकता है दिल के सारे अँधेरों को, पल भर में मिटाता है [Chorus] ख़्वाजा... ख़्वाजा... बारिश में भी तेरा दरबार ख़्वाजा... ख़्वाजा... रूह को मिल गया प्यार सुल्तान-ए-हिंद या ख़्वाजा, हम पर नज़र उतार बारिश की हर बूँद करे, तेरा ही नाम पुकार [Verse 1] दरगाह के सहन में, भीगी मिट्टी महकती है थकी हुई हर रूह यहाँ, आकर राहत पाती है भीगे क़दमों से सबने, “या ख़्वाजा” कह दिया टूटे हुए हर दिल ने, तेरा दामन थाम लिया छत के कोने-कोने से, बूँदें नग़मे गाती हैं तेरे दर की ठंडी हवाएँ, रूह को सुकून दिलाती हैं [Hook Repeat] बारिश बरस रही है, तेरे दर पे खड़े हैं दिल के मेरे आँसू भी, इन बूँदों में पड़े हैं भीगे-भीगे सज्दे में, रूह मेरी झुकती है ख़्वाजा तेरी दरगाह से, रहमत ही बरसती है [Verse 2] दिल पे बोझ पुराने ग़म का, सालों से जो छाया था ख़्वाजा तेरी इक नज़र ने, सब दर्द मिटाया था बारिश की ठंडी बूँदें, जैसे मरहम बन जाती हैं दरगाह के इस आँगन में, उम्मीदें मुस्काती हैं जब भी सोचूँ कौन सुनेगा, मेरे दिल की ये पुकार तेरे दर पर आकर मिलता, रूह को फिर क़रार [Chorus Repeat] ख़्वाजा... ख़्वाजा... बारिश में भी तेरा दरबार ख़्वाजा... ख़्वाजा... रूह को मिल गया प्यार सुल्तान-ए-हिंद या ख़्वाजा, हम पर नज़र उतार बारिश की हर बूँद करे, तेरा ही नाम पुकार [Bridge] भीगी चादर, भीगी देहलीज़, भीगा हुआ दरबार नाम तेरा जब लेते हैं, जल उठता दिल का प्यार हाथ उठाकर लोग यहाँ, रहमत को पुकारते हैं अश्क़ों के संग बूँदें भी, सज्दों को निखारते हैं हर “अल्लाह हू” की गूँज में, तेरा ज़िक्र उतरता है ख़्वाजा तेरी दरगाह में, टूटा दिल सँवरता है [Climax] बारिश में तेरी दरगाह, नूर की इक लहर है हर धड़कन कहती है, ख़्वाजा मेरा रहबर है या ख़्वाजा, या ग़रीब नवाज़, तेरी शान निराली है बारिश की रातों में भी, तेरी लौ उजियाली है जब-जब दिल टूट जाता है, मैं तेरे दर आ जाता हूँ भीगी दरगाह, भीगा सज्दा, तुझमें सुकून पाता हूँ [Final Chorus] ख़्वाजा... ख़्वाजा... बारिश में भी तेरा दरबार ख़्वाजा... ख़्वाजा... रूह को मिल गया प्यार ख़्वाजा... ख़्वाजा... बारिश में भी तेरा दरबार ख़्वाजा... ख़्वाजा... रूह को मिल गया प्यार सुल्तान-ए-हिंद या ख़्वाजा, हम पर नज़र उतार बारिश की हर बूँद करे, तेरा ही नाम पुकार [Outro] बारिश रुक भी जाए तो, दर का नूर न ढलता है ख़्वाजा के नाम का सज्दा, दिल के अंदर पलता है बारिश हो या सूखा मौसम, दर तेरा न छोड़ूँगा हर साँस में या ख़्वाजा, तेरा नाम ही बोलूँगा [End]

