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मन की चंचल तरंगें 1

[Verse] कमी नहीं होती कभी ये दिल कहे सपनों की रेशमी राहें बुन रही उड़ान भरें हर सुबह की रौशनी जहाँ भी चलें वहाँ खुशियों की घटा [Verse 2] मुस्कान चुराए ये चंदा की छाया सितारों से सजाएँ रातों का फसाना फूलों में छुपी है खुशबू की माया सांग कोई गुनगुनाए दिल की रवानी [Chorus] मिट्टी की सौंधी खुशबू में सजे मन की चंचल तरंगें कभी न सुस्ताए रंगीन रूत आए दिल की किताब में हर मोड़ पर कहकहे बिखराएँ [Bridge] घास की चादर पर लेटे सपनें आसमान की बाहों में ढूँढे अपना जहां सतरंगी पंखों से समेटें ये लम्हें दुनिया की धड़कन मे खो जाएं [Verse 3] खिड़की पर बैठे हवाओं से कहें मेरे गीत में ये रंग तुमसे अच्छे उड़ते पतंगों सा मन का ये रवैया मंजिल भी हो जीत भी हो साथ में [Chorus] मिट्टी की सौंधी खुशबू में सजे मन की चंचल तरंगें कभी न सुस्ताए रंगीन रूत आए दिल की किताब में हर मोड़ पर कहकहे बिखराएँ