
[Chorus] ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनात्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् त्र्यंबकं जपते मन, धीरज से फिर से उठे बँधे जो दिन-रात के धागे, एक सुर में खुलते रहें

[Chorus] ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनात्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् त्र्यंबकं जपते मन, धीरज से फिर से उठे बँधे जो दिन-रात के धागे, एक सुर में खुलते रहें
