🌙 ग़ज़ल: “बस यही पल अपना है” ज़िंदगी के सफ़र में हर बरस कुछ छूटता गया, कुछ अश्कों ने साथ दिया, कुछ ख़्वाबों ने लूटा गया। कुछ चेहरों को हम याद रहे, कुछ यादों में खोते गए, कुछ को भुला न पाए हम, कुछ हमें भूलते गए। कभी क़दम थके, कभी राहें रुकीं, कभी मंज़िल पास नज़र आई, कभी हम ख़ुद को समझते रहे कि ज़माने ने हमसे चाल चली। मगर जब दिल से पर्दा हटा, तो सच ये सामने आया, जो छल था वो दुनिया का नहीं, इंसान ने ख़ुद को ही भरमाया। ना बीता कल मेरा था कभी, ना आने वाला मेरा है, जो साँस अभी चल रही है वही तो सच में मेरा है। जो घट रहा है इस लम्हे में, वही ईश्वर की सौग़ात है, हर पल में जो शुकर बसा ले वही सच्चा इंसान है। तो जी लो इस पल को दोस्तों, यही जीवन का सार है, जो आज को अपना बना ले उसी का हर कल संवार है।