
ले लो इक धूप भरा दिन, फूलों की भर लो तुम टोकरी। आसमान से बारिश की बूँदें, और दिल से ले लो ये प्यार की। चाहे सब कुछ हो जाए ख़िलाफ़, कल से जुदा हो ये आज का समाँ। जिस दिल में प्यार का नाम नहीं, उसे दे दो अपनी ख़ुद की इक जहां। दे दो इक धूप भरा दिन, फूलों से भर दो वो प्यार का जहाँ। बारिश के पानी से कर दो सींचा, राख से उठेगा फिर प्यार का समाँ। फिर ये मोहब्बत सब के ख़िलाफ़, ख़ुद को करेगी दिलों में अर्पण। ख्वाबों के बिना दिल नहीं होता, बिन प्यार और बिन सावन की झंकार। बस एक दिल को, जिसे कम है गरमी मिली, कम है रोशनी, कम हैं फूल, वो मौसम की रंगीन फुहार। दे दो तुम बिन डरे, बिन सोचे, प्यार! और ये चमकेगा रौशनी से भर, देगा वो नूर और गरमी भी, जो दिल जला है सब के ख़िलाफ़, तेरी और मेरी मोहब्बत से ही!

