
ये खाली सा दिल
ये खाली सा दिल किसे आवाज़ दे, जो अपना था, वही आज दूर खड़ा है। जिसे उम्र भर अपना समझते रहे, वही बनके मेरा दर्द चला है। तेरी याद की बारिश में भीगता हूँ मैं, सूखी आँखों से रोता हूँ मैं। तू नहीं है तो कुछ भी नहीं है, फिर भी तुझमें ही जीता हूँ मैं। कभी मेरी धड़कन में रहता था तू, कभी मेरी साँसों में बसता था तू, आज वही धड़कन पूछती है मुझसे— कहाँ खो गया वो जो मेरा था तू? ये खाली सा दिल अब किससे कहे, किसे अपना दर्द सुनाए भला। जिसे देखकर जीने की चाह थी, उसी ने जीना सिखाया नहीं। तेरे जाने का ग़म तो सह लूँगा मैं, तेरी यादों से कैसे जुदा होऊँगा? तूने जो ख़्वाब आँखों में रखे थे, उन ख़्वाबों को कैसे भुला पाऊँगा? रातें गुज़रती हैं तेरी याद में, चाँद भी जैसे उदास रहता है। मैं पूछता हूँ ख़ामोश सितारों से— क्या कोई बिछड़कर भी पास रहता है? न शिकवा है तुझसे, न कोई गिला, बस एक अधूरी सी चाहत रही। तू मेरा होकर भी मेरा न हुआ, और मेरी उम्र तुझे चाहती रही। अगर कभी मेरी याद आए तुझे, तो आँखों को नम मत करना। मैं तो बिखरकर भी जी लूँगा मगर, तू अपने दिल को कमज़ोर मत करना। ये खाली सा दिल तेरा ही रहेगा, चाहे ज़माना मुझे भूल जाए। कुछ रिश्ते मरकर भी मरते नहीं, कुछ नाम मिटकर भी मिटते नहीं। तू लौटे न लौटे, ये किस्मत सही, तेरी याद मगर मेरे साथ रहे। मेरी आख़िरी साँस जब थमने लगे, मेरे होंठों पे बस तेरा नाम रहे।

