[Intro] (Soft acoustic guitar and a gentle flute/bansuri building into a soulful rhythm) [Verse 1] हे प्रभु, तू क्यों दूर खड़ा है? संकट में दिल तुझसे जुड़ा है। दुष्ट लोग करते हैं अभिमान, भूल गए हैं वो तेरा न्याय और ज्ञान। [Verse 2] लोभी कहते हैं ईश्वर ना देखेगा, पाप हमारा वो कैसे लेखेगा। पर तू तो देखता है सब दुख और पीर, टूटे दिलों को तू ही बंधाता है धीर। [Chorus] उठ हे परमेश्वर, हाथ बढ़ा दे, दीन दुखी को राह दिखा दे। तू ही है राजा, महिमा महान है, अनाथों का तू ही तो एक प्राण है। [Verse 3] झूठ बोलते और करते हैं वो छल, सोचते हैं कि कभी ना खोएंगे बल। पर तूने देखा है उनका हर एक पाप, न्याय करेगा तू, मिटेगा संताप। [Chorus] उठ हे परमेश्वर, हाथ बढ़ा दे, दीन दुखी को राह दिखा दे। तू ही है राजा, महिमा महान है, अनाथों का तू ही तो एक प्राण है। [Bridge] नम्र जनों की सुनता है तू पुकार, निर्बल को देता है तू अपना प्यार। न्याय से तेरे गाएगी धरती, भय की छाया अब है उतरती। [Guitar Solo] (Soulful, emotional, and uplifting acoustic melody) [Chorus] उठ हे परमेश्वर, हाथ बढ़ा दे, दीन दुखी को राह दिखा दे। तू ही है राजा, महिमा महान है, अनाथों का तू ही तो एक प्राण है। [Outro] सिंहासन पर तू करेगा सदा राज, अकेले नहीं हम, तू है सरताज। सुन ले हमारी ये विनती और गान, सदा करेंगे हम तेरा ही सम्मान। (Fade out on a lingering, soothing chord)