
Ghrishneshwar jyotirlinga katha
ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय… मस्तक पर चंद्र, कंठ में विष विराजे, भक्त की पुकार पर भोलेनाथ साजे। कैलास छोड़ धरती पर आए, करुणा और प्रेम का पथ दिखाए। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, जय जय जय महादेव। ⸻ [कथा-भजन 1 : पीड़ा की भूमिका] देवगिरि पर्वत, वेरुल की धरती, वहाँ बसे सुदर्मा, धर्म की मूर्ति। पत्नी सुदेहा, सती और साध्वी, पर सूना आँगन, पीड़ा थी भारी। साल बीते, आँखें नम ही रहीं, मन में प्रश्न — क्या गोद भरेगी नहीं? [भजन पंक्तियाँ:] सूना आँगन, सूनी राहें, शिव से ही आशा लाई। भोले ही पालनहार हमारे, उनसे ही आस बँधाई। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय। ⸻ [कथा-भजन 2 : घुष्मा की भक्ति] धर्म की राह पर सुदेहा चली, बहन घुष्मा संग जीवन जोड़ी। घुष्मा सरल, पर भक्ति अपार, शिव नाम ही उसका संसार। [भजन पंक्तियाँ (मुख्य भाव):] हर दिन एक सौ एक दीप जलाए, हर दीप में शिव का ध्यान समाए। न थकी, न रुकी, भक्ति में डूबी, हर श्वास में भोले को बसाए। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय। ⸻ [कथा-भजन 3 : वरदान और ईर्ष्या] भोले प्रसन्न, वरदान दिया, घुष्मा की गोद में पुत्र हँस दिया। घर में उजियारा, मंगल गान, पर ईर्ष्या ने लिया विष का स्थान। सुदेहा के मन में छाया अंधेर, भक्ति बुझी, जागा विषम फेर। [भजन पंक्तियाँ:] ईर्ष्या जब मन में घर कर जाए, धर्म का दीप बुझ सा जाए। जहाँ बसते थे देव हमारे, वहीं पाप ने डेरा डाले। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय। ⸻ [कथा-भजन 4 : अडिग विश्वास] प्रभात हुआ, सत्य खुल गया, पर घुष्मा का विश्वास न डगमगाया। मिट्टी उठाई, लिंग बनाया, भोले का नाम फिर दोहराया। वो बोली धीमे, अश्रु विहीन, “जो शिव ने दिया, वो शिव ने ही छीन।” [भजन पंक्तियाँ:] ना बदली पूजा, ना टूटी आस, भक्ति रही श्वासों के पास। शिव की मर्जी, शिव का लेख, यही सच्चा विश्वास विशेष। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय। ⸻ [कथा-भजन 5 : शिव प्राकट्य] डमरू गूँजा, धरती काँपी, करुणा ने क्रोध की राह को थामी। त्रिशूल उठा, अधर्म हारा, पर क्षमा ने शिव को रोक डाला। घुष्मा बोली — “प्रभु, क्षमा…” पिघल गया कैलास का धामा। [भजन पंक्तियाँ:] क्षमा के आगे झुका त्रिशूल, करुणा बनी महाशक्ति मूल। भोले ने फिर जीवन लौटाया, मृत्यु को भी जीत दिखाया। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय। ⸻ [कथा-भजन 6 : ज्योतिर्लिंग स्थापना (समापन)] शिव बोले — “तेरी भक्ति, तेरी क्षमा, मुझे यहीं बाँध लाई घुष्मा।” मैं यहीं ज्योति बन कर रहूँ, भक्तों के दुख हर पल सहूँ। युगों से पूजित यह पावन स्थान, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महान। [महाभजन (अंतिम मुखड़ा):] घुष्मा की भक्ति से उतरा शिव, पत्थर ज्योति बन गया। जहाँ क्षमा ने रोका त्रिशूल, वो धाम महादेव बन गया। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ⸻ [🔱 Ending (soft repeat)] ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…

