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तेरी रूह से पवित्र क्या है

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रात की ख़ामोशियों में, तेरा चेहरा याद आया, चाँद भी ठहरा हुआ था, जब तेरा ख़याल आया। तेरी आँखों की चमक में, एक दुनिया बस गई है, तेरी साँसों की महक से, मेरी साँसें सज गई हैं। क्या कहूँ मैं तेरी रूह से, क्या कहूँ तेरे दिल से, इस जहाँ में कुछ नहीं है, तेरे होने के सिवा। तेरी रूह से पवित्र क्या है, तेरे दिल से ख़ूबसूरत क्या है, मैंने दुनिया देख ली सारी, तेरे जैसा और कुछ नहीं है। तेरी आवाज़ जब आती है, शाम जैसे मुस्कुराती है, दूर रहकर भी तू मुझसे, हर घड़ी मिलने चली आती है। तेरी यादों की बारिश में, दिल मेरा भीगता रहा, एक तेरी ही मोहब्बत थी, जो मुझे जीना सिखाती रही। अगर फ़रिश्ते भी पूछें मुझसे, इश्क़ की पहचान क्या है, मैं तेरा नाम लेके कह दूँ, इससे बढ़कर और क्या है। तेरी रूह से पवित्र क्या है, तेरे दिल से ख़ूबसूरत क्या है, मेरी दुनिया, मेरी चाहत, मेरी हर धड़कन में तू है। वक़्त चाहे छीन ले मुझसे, चाँद, तारे, ये फ़िज़ाएँ, तेरा हाथ जो रहे हाथों में, कम हैं फिर भी ये ख़ुदाएँ। कोई दौलत क्या ख़रीदेगी, तेरे दिल की वो मोहब्बत, जिसको पाने के बाद लगता है, मिल गई सारी इबादत। तेरी ख़ामोशी भी सुनता हूँ, तेरी आहट भी पहचानूँ, तू अगर दूर भी हो मुझसे, फिर भी तुझको पास जानूँ। ज़िंदगी की आख़िरी साँस तक, तेरा नाम रहेगा होंठों पर, और अगर इश्क़ अमर है तो, हम मिलेंगे फिर किसी मोड़ पर। तेरी रूह से पवित्र क्या है, तेरे दिल से ख़ूबसूरत क्या है, इस सवाल का जवाब सिर्फ़ तू है, और मेरा जवाब सिर्फ़ तू है। रात ढल जाएगी एक दिन, चाँद भी खो जाएगा, ये बदन मिट्टी में मिल जाएगा, पर ये इश्क़ कहाँ मिट पाएगा। तेरी रूह से पवित्र क्या है… तेरे दिल से ख़ूबसूरत क्या है… तू रहे या न रहे इस जहाँ में, मेरा दिल तेरा ही रहेगा।