
[Hook] मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई हर दर्द की गहराई... ख़्वाजा जी... तुझ तक है आई मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई [Chorus] हाथ उठाए खड़ा हूँ मैं तेरे दर पे अब तो सुन ले मेरी गुहार ख़्वाजा हाथ उठाए खड़ा हूँ मैं तेरे दर पे अब तो सुन ले मेरी पुकार ख़्वाजा [Verse 1] अपनों ने जो दिए हैं ज़ख्म भरे कोई नहीं है तेरे सिवा अब मेरे हर दर से मायूस होकर ख़्वाजा तेरी चौखट पे आ झुके सर मेरे तेरे बिना ना कोई सहारा है तेरे बिना ना कोई किनारा है मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई [Verse 2] रातों की तन्हाई में रो-रो के तेरा ही नाम लिया है खो-खो के अब तो आँखों का पानी भी सूखा तेरी दहलीज़ पे आया हूँ हार के मेरी बिगड़ी बात बना दे तू मेरी खाली झोली को भर दे तू मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई [Bridge] हक़ ख़्वाजा... हक़ ख़्वाजा... या ग़रीब नवाज़... तेरे दर का हूँ सवाली ख़्वाजा तू है सबका वाली ख़्वाजा मेरी सूनी झोली में अब तो अपनी रहमत भर दे [Verse 3 - Ajmer Connection] अजमेर की गलियों में आके तेरी चौखट पे सर को झुकाके हर बेबस ने तुझे पुकारा तूने सबकी पुकार सँभाली तेरी दरगाह का है उजियारा तूने हर डूबते को दिया सहारा ग़रीब नवाज़ तेरी इनायत हर ज़ख़्म पे बन गई रहमत मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई [Final Chorus] हाथ उठाए खड़ा हूँ मैं तेरे दर पे अब तो सुन ले मेरी गुहार ख़्वाजा हाथ उठाए खड़ा हूँ मैं तेरे दर पे अब तो सुन ले मेरी पुकार ख़्वाजा [Outro - Live Mehfil Call-and-Response] तेरी चौखट पे आया हूँ... खाली दामन लाया हूँ... तू ही मेरा सहारा... मेरी कर लो सुनवाई... मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई मेरी कर लो सुनवाई... ख़्वाजा जी... कर लो सुनवाई [End]

