
Title: “बच्चों को साँस लेने दो” (Humanitarian Pop Ballad) [Intro] (soft piano) ओ… ओ… [अंतरा 1] सुबह तो आती है, पर आसमान थका-सा, सूरज भी जैसे परदे में छुपा-सा। छोटे-छोटे फेफड़े सीख रहे हैं हिम्मत, मेदान सूना-सूना, खेल की भी क़ीमत। हर कदम पे धुंध, हर मोड़ पे रुकावट, बचपन को चाहिए बस थोड़ी-सी राहत। [पूर्व-कोरस] अगर सुनो ध्यान से, हवा कुछ कहती है, चुप-सी चेतावनी, पर उम्मीद रहती है। [कोरस] बच्चों को साँस लेने दो, बच्चों को आस दो, नीला-सा आसमान फिर उनके पास दो। हम बदल सकते हैं, तुम और मैं, हर उस बच्चे के लिए—जो जीना चाहे। बच्चों को साँस लेने दो… बच्चों को साँस लेने दो… [अंतरा 2] ये सिर्फ़ खाँसी नहीं, आँखों का पानी नहीं, ये स्कूल के दिन छूटना, ये कहानी सही? ध्यान बिखर जाना, थक जाना शाम को, नींद का टूट जाना, डर-सा हर काम को। ये वो बोझ है जो दिखता नहीं बाहर, पर भीतर-भीतर भारी कर देता हर पल। [पूर्व-कोरस] पर छोटे-छोटे फैसले बड़ा काम कर जाते, हम साथ चलें तो रास्ते साफ़ हो जाते। [कोरस] बच्चों को साँस लेने दो, बच्चों को आस दो, नीला-सा आसमान फिर उनके पास दो। हम बदल सकते हैं, तुम और मैं, हर उस बच्चे के लिए—जो जीना चाहे। बच्चों को साँस लेने दो… बच्चों को साँस लेने दो… [सेतु/ब्रिज] (बच्चों की choir के लिए) (बच्चे) हमको खेलना है, हमको हँसना है, साफ़ हवा में रोज़-रोज़ बसना है। हमको पढ़ना है, आगे बढ़ना है, नीले आसमान से दिल भरना है। (मुख्य स्वर) AQI देखो, समय बदलो, धुएँ-धूल से दूरी रखो। खराब दिन में बाहर कम जाना, मास्क लगाना, सही है मानना। पेड़ लगाओ, हरियाली बढ़ाओ, जलाना रोको, धूल को दबाओ। घर-स्कूल में हवा रहे साफ़, तभी तो होगा हर सपना साफ़। [अंतिम कोरस] (मुख्य स्वर + बच्चे) बच्चों को साँस लेने दो, बच्चों को आस दो, नीला-सा आसमान फिर उनके पास दो। हम बदल सकते हैं, तुम और मैं, एक साथ, एक वादा—साफ़ हवा हर कहीं। बच्चों को साँस लेने दो… बच्चों को साँस लेने दो… ओ… बच्चों को साँस लेने दो…

