
ॐ जय माता दी, जय माँ भवानी पहले गणपति को मनाऊं, फिर मनाऊं काली कल्याणी मधुबंती नहीं, आज तेरी पूजा गाएगी ये कहानी महिषासुर मर्दिनी माँ, सुन ले मेरी वाणी [श्लोक 1] अयि गिरि नन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवर विन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते [श्लोक 2] सुरवर वर्षिणि दुर्धर धर्षिणि दुर्मुख मर्षिणि हर्षरते त्रिभुवन पोषिणि शंकर तोषिणि किल्बिष मोषिणि घोषरते दनुज निरोषिणि दितिसुत रोषिणि दुर्मद शोषिणि रोषरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते [श्लोक 3] अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रिय वासिनि हासरते शिखरि शिरोमणि तुंग हिमालय शृंग निजालय मध्यगते मधु मधुरे मधु कैटभ गंजिनि कैटभ भंजिनि रासरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते [श्लोक 4] अयि शतखण्ड विखण्डित रुण्ड वितुण्डित शुण्ड गजाधिपते रिपु गज गण्ड विदारण चण्ड पराक्रम शुण्ड मृगाधिपते निज भुजदण्ड निपातित खण्ड विपातित मुण्ड भटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते [आखिरी में वरदान वाला अंतरा - Pooja Style] सुर मुनि मोहिनी, भक्तों की जननी, तेरी महिमा अपरम्पार तेरी पूजा खड़ी द्वार पे, कर दे बेड़ा पार

