
[मुखड़ा] मिटा दे हस्ती मेरी, कि अब ये प्यास बाकी है दिखा दे दीदार अपना, कि बस एक आस बाकी है कागा सब तन खाइयो, चुन-चुन खाइयो मास पर दो नैना मत खाइयो, मोहे पिया मिलन की आस... पिया मिलन की आस, मोहे पिया मिलन की आस... [अंतरा 1] ये जिस्म तो मिट्टी है, इसे मिट्टी में मिल जाना है पर इस रूह का ठिकाना, बस तेरे दर पे पाना है हवाओं में घुली है खुशबू, तेरे ही नाम की मौला हर धड़कन में बस्ती है, तेरी ही याद की मौला कागा सब तन खाइयो, पर छोड़ दियो ये नैना इन्हीं आँखों से मुद्दत से, देखा है तेरा सपना मोहे पिया मिलन की आस... [अंतरा 2] मैं जोगन बनके बैठी हूँ, तेरी राहों की धूल में मिले सुकून ये दिल को, तेरे इबादत के फूल में ना दुनिया की कोई चाहत, ना जन्नत का कोई अरमान मेरे पिया तू ही मेरा दीन, तू ही मेरा ईमान सब अंग मेरा तू ले जा, चाहे कर दे मुझे ख़ाक बस देख लूँ एक बार उसे, जिसका दिल है पाक़ मोहे पिया मिलन की आस... [Outro - समापन] रूठ कर हम उन्हें, भूल जाने लगे... पर हर साँस में वही, मुस्कुराने लगे... पिया मिलन की आस... मोहे पिया मिलन की आस... (बांसुरी की गूंज के साथ संगीत धीरे-धीरे शांत होता है)

