ग़म तो आते-जाते रहते हैं यहाँ, ऐ मियाँ बादलों से हैं ये गुज़रते कारवाँ, ऐ मियाँ तुम बताओ क्या है दिल में राज़ क्या, ऐ मियाँ ताकि कर दें हम भी उसका कुछ इलाज़, ऐ मियाँ शर्म से कुछ भी न हासिल हो सका, ऐ मियाँ खुल के कह दो क्या सताता है तुम्हें, ऐ मियाँ जब तलक तुम बोझ दिल का ढोते रहोगे यूँ फूल-सी इस ज़िंदगी में चुभेंगे काँटे ही काँटे, मियाँ रोग है तो फिर दवा भी है कहीं ढूँढ लो तुम क्यों भटकते हो जहाँ, ऐ मियाँ ज़िंदगी की तेज़ रफ़्तारों में तुम किस तरफ़ भागे चले जाते हो, ऐ मियाँ इश्क़ अपने ग़म से कर बैठे नहीं ख़ुद से पूछो ये ज़रा-सा सवाल, ऐ मियाँ ऐसे कम्बख़्त इश्क़ को छोड़ो अभी अस्ल मोहब्बत देगी तुमको आसरा, ऐ मियाँ अस्ल चाहत दिल को राहत दे सदा इसको हरगिज़ मत कभी करना जुदा, ऐ मियाँ किस गली, किस मोड़ पर मिलती है वो धूप में या छाँव में मिलती है क्या, ऐ मियाँ क्या कोई दुकान है उसकी कहीं या किसी मॉल में बिकती है वफ़ा, ऐ मियाँ