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हार केवल हार नहीं

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हार केवल हार नहीं होती, जीत भी हर बार जीत नहीं होती। जो गिरकर फिर खड़ा हो जाए, उससे बड़ी कोई जीत नहीं होती। कामयाबी की हर कहानी में खुशियों का कोई राज़ नहीं, कुछ मंज़िलें मिलकर भी पूछें— “क्या यही था, जो चाहा था कभी?” जीवन केवल साँस नहीं है, जीना केवल नाम नहीं, कभी किसी के लिए जीना, अपने जीने से कम नहीं। मुस्कान को मुस्कान न समझो, हर हँसी में चैन नहीं, कितने चेहरे फूल बने हैं, जिनकी आँखों में नींद नहीं। आँसू को भी कम मत आँको, हर आँसू बेकार नहीं, जो दिल की भाषा कह जाए— उससे पवित्र पुकार नहीं। रोना केवल टूटना कब है, रोना भी उपचार है, जिस दिल ने जी भर रोना सीखा, उस दिल में फिर प्यार है। मिलना भी तो अंत नहीं है, बिछड़ना भी अंत नहीं, कुछ रिश्ते पास रहकर मरते, कुछ दूरी में भी कम नहीं। खुशियाँ आईं, चली भी गईं, दर्द भी ठहरा कब यहाँ, वक़्त किसी के साथ न ठहरा, फिर किस बात का अभिमान यहाँ? जिसने काँटों पर चलना सीखा, फूलों से वह क्या डरे, जिसने आँधी झेली हो तो वह तूफ़ानों से क्यों डरे? ठोकर को दुश्मन मत समझो, ठोकर भी गुरु होती है, राह भटकने वाला जाने— मंज़िल कितनी दूर होती है। जिस दिन अपना दर्द समझकर दूजे का दर्द समझोगे, उस दिन शायद जान सकोगे— इंसान बनना क्या होता है। नफ़रत लेकर कौन जिया है? नफ़रत किसका साथ रही? अंत समय में साथ न दौलत, बस इंसान की बात रही। जीत मिले तो सिर मत ऊँचा, हार मिले तो टूट मत जाना, वक़्त बदलता रहता है— अपने आप से रूठ मत जाना। आज अगर अँधियारा है तो कल सूरज भी आएगा, जो दीपक तूफ़ान में जलता, वही सवेरा लाएगा। रास्ते चाहे कठिन मिलें तो पाँव रोकना मत तुम, थक जाओ तो बैठ ज़रा पर पीछे लौटना मत तुम। हार मिले तो सीख बना लो, दर्द मिले तो गीत बना, टूटे हुए ख़्वाबों से ही एक नया संसार बना। जीवन सुख का नाम नहीं है, जीवन केवल पीर नहीं, हँसी और आँसू दोनों मिलकर कहते हैं—जीवन हार नहीं। जब तक दिल में साँस बची है, तब तक कोई अंत नहीं, इंसान वही जो गिरकर बोले— “अभी मेरी हार नहीं।” हार केवल हार नहीं होती, जीत भी हर बार जीत नहीं होती, चलते रहना ही जीवन है— रुक जाना ही जीवन नहीं होता।